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Feb 11, 2024

Uttarakhand Kesari Dangal 2024

By Deepak Ansuia Prasad

 

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उत्तराखंड केसरी दंगल 2024 


 कोविड-19 के प्रकोप ने हमें अपने गृह राज्य उत्तराखंड में स्थानांतरित कर दिया, अब मैं यहीं बस गया हूं। मेरे सभी दोस्त जानते हैं कि मैं कुश्ती का प्रचारक हूं। मैंने 2008 में यहां एक अस्थायी अखाड़ा खोला था। यहां शिफ्ट होने के बाद मैंने यहां कुश्ती परंपरा शुरू करने की कोशिश की। मैं यहां एक बेहतरीन कुश्ती अकादमी स्थापित करने का प्रयास कर रहा हूं, जो निर्माणाधीन है। COVID19 के दौरान, मैंने यहां दंगल की परंपरा भी शुरू की। यहां के लोगों को कुश्ती बहुत पसंद थी. उन्होंने मुझसे कहा कि इस बार गेंद मेले में एक बड़ा कुश्ती मैच आयोजित करो. मेरे गांव में हर साल एक विशाल गेंद मेला आयोजित करने की परंपरा है. कार्निवल में भारत के कोने-कोने से लोग आते हैं। मेला आयोजन समिति ने मुझे कार्निवल के दिन दंगल आयोजित करने के लिए कहा, और मैं बहुत खुश था, क्योंकि यह मेरे लिए कुश्ती का प्रदर्शन करने और यहां कुश्ती संस्कृति स्थापित करने का एक बड़ा अवसर था। क्योंकि मेले में मेरे जिले से लगभग सभी लोग भाग लेंगे। इस तरह से दंगल के एक विशाल कुश्ती आयोजन का विचार आया। दंगल की व्यवस्था बहुत कठिन होती है, इसमें पहलवानों, गणमान्य व्यक्तियों, विशेष आमंत्रित लोगों को आमंत्रित करना, अखाड़े की तैयारी करना, पहलवानों के रहने और उनके भोजन की व्यवस्था करना शामिल है। पहलवानों को नकद पुरस्कार के अलावा किराया भी देना पड़ता था। यह एक महान कार्य है, और इस समय मेरे दोस्तों ने मेरी मदद की. दंगल में तीन टाइटल रखे गए , उत्तराखंड केसरी ( पुरष ) उत्तराखंड केसरी ( महिला ) और उत्तराखंड कुमार , इसके अलावा अन्य कुश्तियां भी रखी गई। दंगल में दिल्ली के गुरु खलीफा , दलीप चांवरिया जो की गुरु श्यामलाल अखाडा , काली खोजी वाले के संचालक हैं , खलीफा लाल जिनका अखाडा पुरानी दिल्ली में हैं , पप्पू खलीफा जिनका अखाडा गुरु राजकुमार गोस्वामी ( लोनी) है आये। और अपने पहलवानो को लेकर भी आये। इसके साथ साथ उन्होंने दंगल की रूप रेखा और सञ्चालन में भी सहायता की। दंगल में सीहोर से मेरे मित्र अजय बिसोरिया भी अपने पहलवानो को लेकर मध्य प्रदेश से आये। खलीफा दलीप , खलीफा अजय और खलीफा अजय ने दंगल में रेफरी की भूमिका भी निभाई। साथ ही देहरादून से गुरु गोपाल राय , हरिद्वार से गुरु राहुल शर्मा , व् रुड़की , नजीबाबाद व् बिजनौर , हरयाणा , महाराष्ट्र , मध्य प्रदेश , उत्तर प्रदेश व दिल्ली से भी पहलवान पहुंचे। पहलवानो के लिए ठहरने व् खाने पीने की व्यवस्था की गई। साथ ही पहलवानो को आसपास की खूबसूरत पहाड़ियों व् महाबगढ़ मंदिर , भैरव गढ़ी मंदिर व् बांसुली और खुलकाण्डी गाँव की सीमा पर बने हनुमान मंदिर के दर्शन भी कराये गए। सभी पहलवानो को नकद इनाम के अलावा आने जाने के लिए उचित किराया भाड़ा भी सम्मान स्वरुप दिया गया। 16 तारीख को सुबह हम लोग पगड़ी , झंडे , अखाडा बनाने का सामान , रस्सी इत्यादि लेकर थलनदी के मैदान में पहुँच गए। वहां पर हमने ट्रेक्टर की सहायता से अखाडा बनाया। अखाड़े के चारों और बांस लगाए , उन पर श्री राम और दंगल के झंडे लगाए। अखाड़े को जगाने के लिए उस पर मेडी फिराई , फिर उसपर हल्दी, चन्दन , तेल , मेहंदी और फूलों का छिड़काव किया। उसके बाद हनुमानजी की वंदना की और अखाड़े में कुश्ती का शुभारंभ किया। दंगल में उत्तराखंड केसरी बने रवि पहलवान , अखाडा नाथुपुर गुरु हरिपाल , नीरज पहलवान गुरु जसराम बने उत्तराखंड कुमार व् यशिका शर्मा गुरु राहुल शर्मा बनी उत्तराखंड केसरी महिला पहलवान। सभी विजेताओं का गुर्ज , पटका , पगड़ी नकद इनाम देकर सम्मान किया गया। और साथ ही बहुत से अन्य पहलवानो की कुश्तियां कराई गई। दंगल में पूर्व सैनिक रहे गणमान्य रिटायर्ड सैन्य अधिकारीयों का देश सेवा में योगदान देने के लिए पगड़ी पहना कर मान सम्मान किया गया। साथ दंगल में कीर्तन मंडली से जुडी महिलाओं का भी मान सम्मान किया गया। और दंगल में सभी गुरु खलीफाओं और कोच का पारम्परिक पगड़ी पहना कर सम्मान किया गया। दंगल में संरक्षक रहे यमकेश्वर के हमारे प्रिय नेताजी हेमंत बहुखंडी व् साथ ही थलनदी मेला अध्यक्ष सुबोध सिंह नेगी , नत्थी सिंह बिष्ट , रविंदर सिंह बिष्ट , पूर्ण चंद्र अमोली , बलवंत सिंह बिष्ट ग्राम पथुर अकरा , ACP क्राइम ब्रांच दिल्ली श्री ललित मोहन नेगी जी , पदम् पंवार , sho बिथ्याणी , सुनील नेगी , प्रमुख कनिष्ठ अशोक रावत, देवेंदर बहुखंडी आदि अतिथियों का पगड़ी पहना कर मान सम्मान दिया गया। इंडियन स्टाइल कुश्ती संघ जिला सीहोर के अध्यक्ष अजय बिसोरिया ने कुश्ती की सेवा के लिए मुझे दंगल में पगड़ी पहना कर सम्मानित किया। साथ ही थलनदी मेला कमिटी द्वारा मुझे पगड़ी , फूलमाला व् महाबगढ़ गौरव सम्मान दिया गया इसके लिए मैं भाई अजय बिसोरिया व् मेला कमेटी का आभार व्यक्त करता हूँ। 

 Uttarakhand Kesari Dangal 2024

The outbreak of Covid-19 shifted us to my home state Uttarakhand, now I am settled here. All my friends know I'm a wrestling promoter. 

I opened a temporary akhada here in 2008. After shifting here, I tried to start the wrestling tradition here. I am trying to establish a great wrestling academy here, which is under construction. During COVID19, I also started the tradition of Dangal here. 

The people here loved wrestling. they requested me to organize a big wrestling match in the ball fair ( ancient Ball game) " Gindi Kauthig" Fair this time. 

 There is a tradition of organizing a huge fair every year in my village. People from every corner of India come to the the fair. The fair organizing committee asked me to organize a big dangal evnet on the carnival day, and I was very happy, as it was a great opportunity for me to showcase wrestling and establish wrestling culture here. 

Because almost everyone from my district will participate in the fair. This is how the idea of organizing a huge wrestling event called Dangal came to light. 

 The arrangements of Dangal are very difficult, it involves inviting wrestlers, dignitaries, special invitees, preparing the arena, arranging for the wrestlers' stay and their food. Apart from the cash prize, the wrestlers also had to pay conveyance expenses. This is a great work, and my friends helped me during this time. 

Three titles were kept in Dangal, Uttarakhand Kesari (men), Uttarakhand Kesari (women) and Uttarakhand Kumar, apart from this other wrestling matches were also kept. Guru Khalifa of Delhi, Dalip Chawaria who is the head of Guru Shyamlal Akhara, Kali Khoji Wale were kept in Dangal. , Khalifa Lal whose Akhara is in Old Delhi, Pappu Khalifa whose Akhara is Guru Rajkumar Goswami (Loni) came. And also brought his wrestlers. 

Along with this he also helped in designing and conducting the dangal. In Dangal, my friend Ajay Bisoria from Sehore Madhya Pardesh also came with his wrestlers. Khalifa Dalip, Khalifa Ajay also played the role of referee in Dangal. Besides, Guru Gopal Rai from Dehradun, Guru Rahul Sharma from Haridwar, wrestlers from Roorkee, Najibabad and Bijnor, Haryana, Maharashtra, Madhya Pradesh, Uttar Pradesh and Delhi also arrived. 

Arrangements for accommodation and food were made for the wrestlers. The wrestlers were also shown the surrounding beautiful hills and Mahabgarh temple, Bhairav Garhi temple and Hanuman temple situated on the border of Bansuli and Khulkandi villages. 

Apart from the cash reward, all the wrestlers were also given appropriate fare for their travel as a mark of respect. 

On the morning of 16th, we reached the Thalnadi grounds with turbans, flags, material for making the akhada, ropes etc. There we built an arena with the help of a tractor. Bamboos were planted around the arena and flags of Shri Ram and Dangal were placed on them. 

To wake up the Akhara, mehandi was sprinkled on it, then turmeric, sandalwood, oil, henna and flowers were sprinkled on it. After that worshiped Hanumanji and started wrestling in the arena. 

 In Dangal, Ravi became Uttarakhand Kesari wrestler, Akhara Nathupur Guru Haripal, Neeraj wrestler became Guru Jasram Uttarakhand Kumar and Yashika Sharma of Guru Rahul Sharma, won Uttarakhand Kesari female wrestler. title . All the winners were honored with cash prizes gurj, patka and turban. And many other wrestlers also wrestled. 

During the Dangal, distinguished retired military officers who were ex-servicemen were honored by wearing turbans for their contribution in the service of the country. Along with this, women associated with the Kirtan troupe were also honoured. And in the dangal, all the Guru Khalifas and coaches were honored by wearing traditional turbans. 

Our dear Netaji Hemant Bahukhandi of Yamkeshwar who headed the Dangal along with Thalnadi Fair President Subodh Singh Negi, Nathi Singh Bisht, Ravinder Singh Bisht, Purna Chandra Amoli, Balwant Singh Bisht Village Pathur Accra, ACP Crime Branch Delhi Shri Lalit Mohan Negi ji, Padam Panwar, Sho Bithyani, Sunil Negi, Chief Junior Ashok Rawat, Devendra Bahukhandi etc. guests were honored by wearing turbans. 

 Ajay Bisoria, President of Indian Style Wrestling Association District Sehore, honored me for my service to wrestling by wearing a turban in the dance. 

Also, I am thankful to brother Ajay Bisoria and the fair committee for giving me turban, flower garland and Mahabgarh Gaurav Samman by the Thalnadi Fair Committee.

 

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